पैसा आते ही हिस्सा अलग रखें, काग़ज़ सँभालें, और तारीख़ें खुद देखें।
यह सलाह नहीं, काम का ढाँचा है। बाहर से पैसा भेजने वाला कुछ नहीं काटता; अलग रखना पहले भुगतान से आपका काम है। बाहर सेवा बेचना जीएसटी में शून्य दर वाला है, पर करने को कुछ नहीं, ऐसा नहीं। पंजीकरण कारोबार की एक रेखा से शुरू होता है; फिर वचन-पत्र से सेवा बिना कर जमा किए जाती है। मानी हुई आय का रास्ता प्राप्ति का आधा मुनाफ़ा मानता है; अलग रखा हिस्सा उसी पर बनता कर है। बैंक का विदेश से आई रकम वाला काग़ज़ (एफ़आईआरसी/एफ़आईआरए) साबित करता है कि पैसा विदेशी मुद्रा में आया। संख्याएँ बदलती हैं; चालू साल खुद पढ़ें।
- भारत के बाहर से पैसा भेजने वाला कुछ नहीं काटता, इसलिए पैसा आते ही कर अलग रखें।
- बिल, बैंक विवरण, विदेश से आई रकम वाला काग़ज़ और खर्चों का हिसाब — चारों रखें।
- तारीख़ें कर विभाग की अपनी साइट पर देखें, किसी फ़ोरम पर नहीं।
कामबाहर के ख़रीदारों से साल भर के भुगतान, हर एक पूरा आया, कर के लिए कुछ नहीं कटा।
कमज़ोर तरीका दोस्त के कहने पर चौथाई अलग रखता है, हर बिल सँभालता है, जुलाई में बैंक विवरण से रिटर्न भरता है। बैंक से विदेश से आई रकम वाला काग़ज़ कभी नहीं माँगता, कारोबार की रेखा नहीं देखता। दसवें महीने में अनजाने बीस लाख पार; 'निर्यात' से अगले साल एक नोटिस में पाला।
बेहतर तरीका हर भुगतान का तय हिस्सा उसी दिन दूसरे खाते में; हिस्सा मानी हुई आय के नियम से — आधा मुनाफ़ा, कर उसी पर। हर भुगतान का विदेश से आई रकम वाला काग़ज़ बिल के साथ रखता है। बीस लाख की रेखा देखता है, जहाँ से सेवा का पंजीकरण शुरू होता है; कुछ राज्यों में दस। हर अप्रैल वचन-पत्र फिर भरता है। सीमाएँ (पचास, पचहत्तर लाख) विभाग के पन्ने पर पढ़ता है, तारीख़ के साथ।
बेहतर तरीका क्यों काम करता है फ़ोरम सही भी हो सकता है; पर वह विभाग नहीं, और आपकी ओर से जवाब नहीं देगा। कमज़ोर कोशिश हारी: न पैसा विदेशी साबित हुआ, न रेखा दिखी।
बदली हुई स्थिति आज़माएँ किसी फ़ोरम पर एक दोस्त कहता है कि एक सीमा से कम कमाने वाले फ़्रीलांसर को कुछ भी रखने की ज़रूरत नहीं। अपने काग़ज़ों का क्या करेंगे?
अब खुद बनाकर देखें अपनी हिसाब-शीट बनाएँ और उसमें तीन महीने के बिल और भुगतान दर्ज करें। जिस भी नियम पर भरोसा किया — पंजीकरण की रेखा, निर्यात का वचन-पत्र, मानी हुई आय की सीमा — उसके आगे वह तारीख़ लिखें जब आपने उसे देखा, और वह पन्ना भी जिस पर देखा। हर नियम विभाग के पन्ने पर उसके नाम से देखें, किसी पुरानी पोस्ट में लिखी धारा के नंबर से नहीं।